उदास नहीं हूँ , मित्रों....
बस मरम्मतें चल रहीं हैं ज़िंदगी की
इसलिए जरा ख़ामोश हूँ ...
Saturday, 22 December 2018
Monday, 17 December 2018
Farmar
किसानो से अब कहाँ वो मुलाकात करते हैं,
बस ऱोज नये ख्वाबो की बात करते हैं,
पैर हों जिनके मिट्टी में, दोनों हाथ कुदाल पर रहते हैं,
सर्दी , गर्मी या फिर बारिश, सब कुछ ही वे सहते हैं,
आसमान पर नज़र हमेशा, वे आंधी तूफ़ां सब सहते हैं,
खेतों में हरियाली आये, दिन और रात लगे रहते हैं,
मेहनत कर वे अन्न उगाते, पेट सभी का भरते हैं,
वो है मसीहा मेहनत का, उसको किसान हम कहते हैं।
Sunday, 16 December 2018
Tuesday, 11 December 2018
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